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Sunday, January 13, 2019




कोलेस्‍ट्रॉल शरीर के अंदर वसा जैसा पदार्थ होता है जो कि कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदान करने का काम करता है। हम जो कुछ भी कार्ब और फैट खाते हैं यह उससे पैदा होता है, कोलेस्‍ट्रॉल हमारे शरीर को काम करवाने के लिये बहुत ही जरुरी है। हांलाकि ज्‍यादा कोलेस्‍ट्रॉल हमारी धमनियों में इकठ्ठा हो कर जम जाता है, जिससे आगे चल कर दिल की बीमारी होने की समस्‍या पैदा होती है। इसलिये यह बहुत जरुरी है कि कोलेस्‍ट्रॉल के लेवल को हमेशा नियंत्रित रखें खासकर जब आपके के टेस्‍ट में इसका लेवल बहुत ज्‍यादा हाई आया हो तो। आज हम आपको टाप के 7 तरीके बातएंगे जो आपके हाई लेवल कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने में सहायक होगा।

कोलेस्‍ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित करने के लिये रोजाना 40 से 60 मिनट तक व्‍यायाम, सही भोजन जिसमें बिल्‍कुल भी वसा ना हो और शराब तथा स्‍मोकिंग बिल्‍कुल कंट्रोल में करनी की जरुरत होती है। साथ ही आपको ओमेगा 3 फैटी एसिड खाने की जरुरत है जो कि मछली से प्राप्‍त हो सकता है। यह बैड कोलेस्‍ट्रॉल को कम करती है और अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉल को बढाने में मदद करती है। साथ ही यदि आप वेजिटेरियन हैं तो पालक जरुर खाइये, नियमित रूप से पालक खाने से भी आप हार्ट अटैक से बच सकते हैं।

1. धूम्रपान छोडिये: स्‍मोकिंग से धमनियों की अंदर की परत नष्‍ट होने लगती है। सिगरेट में कार्सीनो‍जेन और काबर्न मोनो ऑक्‍साइड होता है जिससे खून में जल्‍दी कालेस्‍ट्रॉल का लेवल बढ जाता है। धूम्रपान करने से खराब कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल बढने लगता है तथा अच्‍छा कोलेस्‍ट्रॉल घटने लगता है।

2. रेगुलर एक्‍सरसाइज करें: यदि आपको हाई कोलेस्‍ट्रॉल की समस्‍या है तो हफ्ते में 4 दिन तो जम कर व्‍यायाम करना ही चाहिये। एक्‍सरसाइज से कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल कम हो जाता है और दिल की बीमारी पास नहीं आती।

3. संतृप्त वसा को कम करें और ट्रांस फैट को छोडे़: आपको अंडे का पीला भाग, फ्राइड फूड, वसा वाला दूध और उससे बने उत्‍पाद और फैटी मीट आदि पूरी तरह से छोड़ना होगा। यह इसलिये क्‍योंकिय यह तेल आपके खराब कोलेस्‍ट्रॉल को बढा सकते हैं। रोजाना केवल 20 ग्राम तक संतृप्त वसा खाने की सलाह दी जाती है।
                                   

4.कंट्रोल में पीजिये शराब: पुरुषों के लिये शराब की सीमित मात्रा दिन में एक या दो गिलास तक होती है और महिलाओं के लिये दिन में शराब का केवल एक गिलास। यदि आप इससे ज्‍यादा पियेगे तो शरीर में वसा जमने लगेगा और कोलेस्‍ट्रॉल बढेगा।

5. ढेर सारा पालक खाएं: माना जाता है कि पालक के साग में 13 फ्लेवनॉइड तत्‍व पाये जाते हैं जिससे कैंसर, हार्ट की बीमारी और ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव होता है। 1/2 कप रोजाना पालक खाने से हार्ट अटैक नहीं होगा।
                                     

6. ओवरवेट हैं तो मोटापा कम करें: यदि आपका वजन बहुत ज्‍यादा है तो उसे कम करें खासकर की अपनी कमर की चर्बी। इसके लिये आपको स्‍पोर्ट, एरोबिक्‍स क्‍लास या जिम ज्‍वाइन कर सकते हैं। ऐसा करने से आपका गुड कोलेस्‍ट्रॉ का लेवल बढेगा और खराब कोलेस्‍ट्रॉ घटेगा।



7.मछली खाइये: इनमें ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जो कि प्राकृति रूप से दिल की बीमारी, हाई कोलेस्‍ट्रॉल और स्‍ट्रोक से दूर रखती है। यह अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल बढाती है और यदि आप मछली नहीं खाते हैं तो आप उसकी जगह पर अखरोठ, सोयाबीन और तिल के तेल का सेवन कर सकते हैं।

                                  

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टॉप 7 तरीके जिससे कम होगा कोलेस्‍ट्रॉल

कोलेस्‍ट्रॉल शरीर के अंदर वसा जैसा पदार्थ होता है जो कि कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदान करने का काम करता है। हम जो कुछ भी कार्ब और फैट खाते ...

Sunday, January 6, 2019









                     

                                                               शुगर पर नियं‍त्रण

कभी आपने सोचा है कि क्‍यों आप वजन कम करने या एक स्‍वस्‍थ डाइट को लागू करने के कार्यक्रम को अपनाने में असमर्थ रहते हैं। और ऐसा करना आपको बिना बताये शुगर की लत की ओर घसीट रहा है। लेकिन आपकी इस समस्‍या के समाधान के लिए इस स्‍लाइड शो में कुछ ऐसे टिप्‍स दिये गये हैं जो मिठाई के प्रति आपकी लालसा में कटौती कर आपको स्‍वस्‍थ खाद्य पदार्थों की तरफ ले जायेगें। इस तरह से खाना न केवल शुगर पर अंकुश लगाने में मदद करेगा बल्कि इससे आप बेहतर, हल्‍का और अधिक सक्रिय भी महसूस करेंगे। इसके अलावा यह वजन घटाने के लक्ष्‍य को पाने में भी आपकी मदद करेगा।

मीठे पेय पदार्थ से क्‍यों तौबा करें (समय: 1 से 2 सप्ताह)

हमें सबसे ज्‍यादा मात्रा में शुगर पेय पदार्थों से मिलता है, इसलिए सॉफ्ट ड्रिक्‍स, मीठा पानी, कॉफी ड्रिक्‍स, एनर्जी ड्रिक्‍स, फ्रूट ड्रिंक्‍स यह सब हमारे लिए एक अपराधी की तरह है। वास्‍तव में एप्‍पल जूस, एप्‍पल फ्लेवर, 100 प्रतिशत स्‍वीटनर और केंद्रित फ्रुक्टोज के संयोजन से बनता है। इसलिए इसे 100 प्रतिशत एप्‍पल का जूस कहते है। इसके अलावा पेय पदार्थों के आकार के कारण बहुत अधिक मात्रा में कैलोरी और शुगर चुपके से आपके आहार में शामिल हो जाती है। एक पेय पदार्थ में लगभग 150 कैलोरी होती है। इसके अलावा मूवी हॉल और फास्‍ट फूड में मिलने वाले पेय पदार्थों में तो 300 से 500 के आसपास कैलोरी होती है।

मीठे पेय पदार्थ से दूर रहने के उपाय

मीठे पेय पदार्थों की लत होने पर इनसे दूर रहना कठिन हो सकता है। और साथ ही इसे छोड़ना आपके लिए एक चुनौती से कम नहीं होगा। इसलिए भी क्‍योंकि यह आपके नए तरीके के आहार का हिस्‍सा नहीं है। इसलिए इसे एक साथ छोड़ने की बजाय धीरे-धीरे इसकी मात्रा को कम कीजिए। ऐसे पेय पदार्थों की सूची बनायें जिसमें शुगर की अधिक मात्रा होती है और और उनसे बचने की कोशिश करें।




जंक फूड से क्‍यों बचें (2-3 सप्‍ताह)

क्‍या आपको फास्‍ट फूड इतना पसंद है कि किसी भी रेस्‍तरां में जाने पर आप इसी को खोजते हैं। तो यह आदत सही नहीं है। क्‍योंकि ऐसे आहार में शुगर और नमक की अधिक मात्रा होने के साथ ही कार्बोहाइड्रेट भी तेल के रूप में मौजूद होता है जो  शरीर में शुगर के स्‍तर को बढ़ा देता है। और हमारे के लिए बहुत नुकसानदेह होता हैं। केक, कुकीज, कैंडी, आइसक्रीम, चिप्‍स, पॉपकॉर्न आदि भी इसी श्रेणी में आते हैं

जंक फूड से बचने के उपाय

शुगरयुक्‍त पेय पदार्थ की तरह जंक फूड से बचना भी आपके लिये थोड़ा मुश्किल हो सकता है। क्‍योंकि अक्‍सर बाहर खाने की वजह से आप इससे बच नहीं पाते। लेकिन धीरे-धीरे आप इसे भी अपने डायट चार्ट से निकाल सकते हैं। इसके लिए अपने जंक फूड सूची बनाकर देखें कि कौन से फूड में शुगर और अन्‍य कार्बोहाइड्रेट की मात्रा सबसे अधिक है। और प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले उसी से दूर रहें। इसकी जगह ताजे फल खाने की आदत डालें, इससे आपको पोषण भी मिलेगा और शुगर से भी बचाव होगा


कार्बोहाइड्रेट को क्‍यों कम करें (3-4 सप्‍ताह)

इस स्‍तर पर पहुंचने पर अपने आपको बधाई दें। हालांकि आपने इस स्‍तर पर जंक फूड और मीठे पेय पदार्थ से कुछ हद तक कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम कर दी है, लेकिन अब भी इसमें कटौती करना जरूरी है। क्‍योंकि ब्रेड, पास्ता और चावल जैसे जटिल कार्बोहाइड्रेट, से निपटने की जरूरत है। दोनों सरल और जटिल कार्बोहाइड्रेट ब्‍लड शुगर को प्रभावित करते हैं। जिससे आपका वजन कम नहीं होता है। इसके अलावा इसके अधिक सेवन से आपको खाने को लेकर लालसा फिर से बढ़ सकती है। 

कार्बोहाइड्रेट कम करने के उपाय

हालांकि आपको ब्रेकफास्‍ट में ब्रेड, पास्‍ता आदि खाने की आदत होती है, लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा होने के कारण यह शरीर में शुगर की मात्रा को बढ़ाता है। इसलिए नाश्‍ते में इनका विकल्‍प तालाशिये, ब्रेड, पास्‍ता, आदि की जगह सलाद, ताजे फल, अंडे खा सकते हैं, इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है। लंच और डिनर में भी इसका ध्‍यान रखें। इसके अलावा इसको छोड़ने का सबसे अच्‍छा तरीका है कि ऐसे कार्बोहाइड्रेट की सूची बनाए जिन्‍हें आप जरूरत से ज्‍यादा खाते हो और फिर उन्हें एक एक करके अपने आहार से दूर करें। 


छिपे हुए शुगर से कैसे बचें (1 से 2 सप्‍ताह)

खाने को अधिक स्‍वादिष्‍ट बनाने के चक्‍कर में आप सॉस, ड्रेसिंग, केचअप और मसालों आदि को अपने आहार में मिलाते हैं। लेकिन यह सब आपके वजन घटाने के लक्ष्य के खिलाफ काम करता हैं। क्‍योंकि कुछ मसालों की एक छोटी सी राशि भी अपने आहार में मिलाकर आप शुगर की मात्रा को ग्रहण करते हैं। डिब्‍बाबंद आहार जिसमें लो फैट लिखा होता है, वह भी शुगरयुक्‍त होते है। इसके अलावा बाजार में मिलने वाले 'शुगर फ्री' उत्‍पादों का उपयोग भी सावधानी से करना चाहिए। क्‍योंकि वास्‍तव में यह उत्‍पाद चीनी मुक्त हो सकते हैं लेकिन यह तेजी से मेटाबोलीज़िंग कार्बोंहाइड्रेट को शामिल करते हैं।

छिपे हुए शुगर से बचने के उपाय

इस चरण में पिछले चरण की तुलना में छिपे हुए शुगर से बचना अधिक आसान होगा क्‍योकि आप एक चरण से दूसरे चरण की प्रगति की ओर है। और आप स्‍वस्‍थ खाने की आदतों को अपना चुके हैं। यहां पर आपका लक्ष्‍य खाद्य पदार्थों पर पोषण लेबल की पहचान कर छिपे हुए शुगर जानना और उसकी जगह दूसरे खाद्य पदार्थों को अपनाना है। 


भोजन के नए रास्ते बनाए रखें (बाकी के जीवन)

यह खाने का तरीका है न कि अस्‍‍थायी आहार योजना। इसका मतलब एक बार अपने आहार से शुगर, कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ को दूर करने के बाद आपको आगे के जीवन में इस तरह से खाने के तरीके को शमिल करना है। लेकिन इसको अस्थायी शामिल करने और पुराने तरीके पर जाने पर आप फिर से बहुत जल्‍द ही लत की इच्‍छाशक्ति की रस्‍सी में फंस जाएगें। ऊपर वर्णित चार चरणों को अपने जीवन में अपनाकर आप स्‍वस्‍थ भोजन शैली को हमेशा बनाये रख सकते हैं।

निय‍म का पालन कैसे करें

याद रखें, प्रत्येक चरण में समय लगता है। इसलिए आवंटित समय को एक न्यूनतम दिशा निर्देशों के रूप में पालन करें। धैर्य से काम लें। खुद पर संयम रखें और इस दिनचर्या का पालन करें। अगर आपको लगता है कि एक चरण आप की उम्‍मीद से ज्‍यादा समय ले रहा है तो परेशान न हो। क्‍योंकि आपका महत्वपूर्ण उद्देश्‍य लक्ष्य को प्राप्त करना है। ऐसा करने से आपके अंदर होने वाले बदलाव आपको दिख जायेंगे। खानपान की यह प्रक्रिया आपको ऊर्जावान तो रखेगी साथ ही मधुमेह जैसी खतरनाक बीमारी से बचायेगी और वजन भी नहीं बढ़ेगा।


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सिर्फ 2 महीने में शुगर को कैसे करें अपनी जिंदगी से दूर

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Friday, December 28, 2018




क्या आप करते है ये घरेलु उपाय इस खतरनाक बीमारी के लिए ?? ये लेख आपके लिए ही बनाया गया है बहुत सारे डॉक्टरों की टीम से बात करने के बाद। इसे जरूर पढ़े और कमेंट में अपना प्रश्न  पूछ  सकते है।

थायरॉइड की समस्या आजकल बहुत ही आम हो गयी है पहले ऐसा माना जाता था कि थायरॉइड की समस्या करीब 40 से ज्यादा की उम्र में ही होती थी लेकिन आजकल तनाव, खानपान और रहन सहन के तरीकों की वजह से आप इस बीमारी को किसी भी ऐज ग्रुप में देख सकते है, यह दो प्रकार का होता है-
1.
हाइपोथायरॉइडिज्म: इसमें वजन बढ़ने लगता है और भूख कम लगती है, हाथ पांव में सूजन आ जाती है और हमेशा सुस्ती और ठंड लगने लगती है।
2.
हाइपरथायरॉइडिज्म: इसमें मरीज का वजन कम हो जाता है और उसे बार-बार भूख लगती है।
थायरॉइड की समस्या ज्यादातर महिलाओं में देखने को मिलती है, थायरॉइड नामक एक ग्रंथि हमारी बॉडी पायी जाती है जिसमें थायरॉक्सिन हॉर्मोन स्रावित होता है, इसी हॉर्मोन की मात्रा कम या ज्यादा होने से इस समस्या का सामना करना पड़ता है। आज हम आपसे थायरॉइड की समस्या से बचाव के घरेलू नुस्खों (Home Remedies For Thyroid Problem) के बारे में बात करेंगें।

थायरॉइड की समस्या को दूर करने के घरेलू उपाय (Home Remedies For Thyroid Problem) :-

1. 
थायरॉइड की समस्या को कम करने में नारियल का पानी बहुत ही लाभकारी होता है।
2. 
थायरॉइड के मरीजों को चावल, मैदा, मिर्च-मसाले, खटाई, मलाई, अंडा, अधिक नमक का प्रयोग करना बंद कर देना चाहिये और सादा नमक की जगह पर सेंधा नमक का इस्तेमाल करना चाहिये।
3. 
थायराइड से पीड़ित रोगी को तली-भुनी चीजें, चीनी, चाय, कॉफी, शराब आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
4. 
थायराइड की समस्या वाले लोगों को दही और दूध का इस्तेमाल अधिक से अधिक करना चाहिए क्योंकि दूध और दही में अधिक मात्रा में कैल्शियम, मिनरल्स और विटामिन्स पाये जाते है।
5. 
अखरोट और बादाम के सेवन से थॉयराइड की प्रॉब्लम को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
6. 
थायरॉइड में मरीजों को सोयाबीन, जंक/फ़ास्ट फ़ूड, ब्रोकली, फूलगोभी, बंदगोभी, मूली आदि का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिये।
7. 
थायरॉइड के मरीजों को अपनी रोजाना की डाइट में पनीर, हरी मिर्च, टमाटर, प्याज, मशरुम, गाजर आदि चीजों को जरूर शामिल करना चाहिये।
8. 
थायरॉइड की समस्या को दूर करने के खाना बनाने में नारियल तेल का इस्तेमाल करना चाहिये और रोजाना भरपूर मात्रा में पानी पीना चाहिये।
9. अखरोट और बादाम:- अखरोट और बादाम में सेलेनियम नामक तत्‍व पाया जाता है जो थॉयराइड की समस्‍या के उपचार में फायदेमंद है। 1 आंउस अखरोट में 5 माइक्रोग्राम सेलेनियम होता है। अखरोट और बादाम के सेवन से थॉयराइड के कारण गले में होने वाली सूजन को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। अखरोट और बादाम सबसे अधिक फायदा हाइपोथॉयराइडिज्‍म (थॉयराइड ग्रंथि का कम एक्टिव होना) में करता है।
10.लौकी का जूस :- रोज सुबह खाली पेट एक गिलास लौकी का जूस पिएं, फिर आधे घंटे तक कुछ भी न खाएं-पिएं थाइरॉयड से राहत मिलेगी
11.धनिए का पानी :- एक गिलास पानी में 2 चम्‍मच साबुत धनिया रातभर भिगोकर रखें। सुबह इस पानी को उबालें और इसमें चुटकीभर नमक डालकर पी लें।


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क्या आप करते है ये घरेलु उपाय इस खतरनाक बीमारी के लिए

क्या आप करते है ये घरेलु उपाय इस खतरनाक बीमारी के लिए ?? ये लेख आपके लिए ही बनाया गया है बहुत सारे डॉक्टरों की टीम से बात करने के ...

Monday, December 17, 2018

साइलेंट किलर नाम से मशहूर इस बीमारी को बहुत ही खतरनाक माना जाता है।  आइये जानते है क्या इस इस बीमारी का उपाय 

थायराइड को साइलेंट किलर माना जाता है, क्‍योंकि इसके लक्षण व्‍यक्ति को धीरे-धीरे पता चलते हैं और जब इस बीमारी के बारे में पता चलती है तब तक देर हो चुकी होती है। इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी से इसकी शुरुआत होती है लेकिन ज्यादातर चिकित्‍सक एंटी बॉडी टेस्ट नहीं करते हैं जिससे ऑटो-इम्युनिटी दिखाई देती है।

आमतौर पर शुरुआती दौर में थायराइड के किसी भी लक्षण का पता आसानी से नहीं चल पाता, क्योंकि गर्दन में छोटी सी गांठ सामान्य ही मान ली जाती है। और जब तक इसे गंभीरता से लिया जाता है, तब तक यह भयानक रूप ले लेता है। थायराइड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रण करती है यानि जो खाना हम खाते हैं यह उसे उर्जा में बदलने का काम करती है। इसके अलावा यह मांसपेशियों, हृदय, हड्डियों व कोलेस्ट्रोल को भी प्रभावित करती है।

थायरॉइड की समस्या आजकल बहुत ही आम हो गयी है पहले ऐसा माना जाता था कि थायरॉइड की समस्या करीब 40 से ज्यादा की उम्र में ही होती थी लेकिन आजकल तनाव, खानपान और रहन सहन के तरीकों की वजह से आप इस बीमारी को किसी भी ऐज ग्रुप में देख सकते है, यह दो प्रकार का होता है-
1. हाइपोथायरॉइडिज्म: इसमें वजन बढ़ने लगता है और भूख कम लगती है, हाथ पांव में सूजन आ जाती है और हमेशा सुस्ती और ठंड लगने लगती है।
2. हाइपरथायरॉइडिज्म: इसमें मरीज का वजन कम हो जाता है और उसे बार-बार भूख लगती है।
थायरॉइड की समस्या ज्यादातर महिलाओं में देखने को मिलती है, थायरॉइड नामक एक ग्रंथि हमारी बॉडी पायी जाती है जिसमें थायरॉक्सिन हॉर्मोन स्रावित होता है, इसी हॉर्मोन की मात्रा कम या ज्यादा होने से इस समस्या का सामना करना पड़ता है। आज हम आपसे थायरॉइड की समस्या से बचाव के लिए हम आपको बता रहे है बहुत लाभदायक योगासन के बारे में ।

1. भुजंगासन : भुजंगासन को कोबरा पोज़ भी कहा जाता है क्योंकि इसमें शरीर के अगले भाग को कोबरा के फन के तरह उठाया जाता है। भुजंगासन की जितनी भी फायदे गिनाए जाएं कम है। भुजंगासन का महत्व कुछ ज्यादा ही है क्योंकि यह सिर से लेकर पैर की अंगुलियों तक फायदा पहुंचाता है। अगर आप इसके विधि को जान जाएं तो आप सोच भी नही सकते यह शरीर को कितना फायदा पहुँचा सकता है। 
भुजंगासन कैसे करे : 
  • आप सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं।
  • अब अपने हथेली को कंधे के सीध में लाएं।
  • दोनों पैरों के बीच की दुरी को कम करें और पैरों को सीधा एवं तना हुआ रखें।
  • अब साँस लेते हुए शरीर के अगले भाग को नाभि तक उठाएं।
  • ध्यान रहे की कमर पर ज़्यदा खिंचाव न आये।
  • अपने हिसाब से इस आसान को बनाए रखें।
  • योगाभ्यास को धारण करते समय धीरे धीरे स्वाँस लें और धीरे धीरे स्वाँस छोड़े।
  • जब अपनी पहली अवस्था में आना हो तो गहरी स्वाँस छोडते हुए प्रारम्भिक अवस्था में आएं।
  • इस तरह से एक चक्र पूरा हुआ।
  • शुरुवाती दौर में इसे 3 से 4 बार करें।
  • धीरे धीरे योग का धारण समय एवं चक्र की नंबर को बढ़ाएं।



2. नाड़ी शोधन: नाड़ी शोधन प्राणायाम के मुख्य प्रकारों में एक है। नाड़ी शोधन प्राणायाम शरीर की अशुद्धियों को दूर करने के लिए किया जाने वाला प्राणयाम है। अन्य प्राणायाम की तरह इस प्राणायाम में भी सांस लिया और छोड़ा जाता है। नाड़ी शोधन प्राणयाम से खून तो साफ़ होता ही है साथ ही खून में ऑक्सीजन का स्तर भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि कैसे नाड़ी शोधन प्राणयाम किया जाता है

नाड़ी शोधन प्राणयाम करने का तरीका:


पालथी मार कर बैठ जाएं: 
सबसे पहले पालथी मार कर बैठें। दायें पैर को बाएं पैर के ऊपर और बाएं पैर को दायें पैर के ऊपर रखें। अपने दोनों हाथ अपने जांघों पर रखें और रिलैक्स हो जाएं और अपनी आंखें बंद करें। यह प्राणायाम करने के लिए किसी साफ सुथरे कमरे का चुनाव करें।
दायीं नाक बंद करें: 
अपने दायें हाथ को अपने चेहरे की तरफ लायें और अपने दायें हाथ के अंगूठे से दायीं नाक को बंद करें।
बायीं नाक से सांस ले: 
दायीं नाक बंद करने के बाद अपनी बायीं नाक से धीरे-धीरे एक गहरी सांस लें। जब फेफड़े हवा से भर जाए तब उतने समय के लिए सांसें रोके जितने समय में आपने सांस ली थी। धीरे धीरे सांसों को छोड़ें। सांस छोड़ने में भी उतना समय लगायें जितना आपने सांस लेने में लिया था। पूरी तरह से सांस छोड़ने के बाद दायीं नाक से अंगूठा हटायें और दोनों हाथों को अपने जांघ पर वापस रख लें।
बायीं नाक बंद करें: 
अपने बाएं हाथ को अपने चेहरे की तरफ लायें और अपने बाएं हाथ के अंगूठे से बायीं नाक को बंद करें।
दायीं नाक से सांस लें: 
अपने दायीं नाक से धीरे-धीरे एक गहरी सांस लें। जब फेफड़े हवा से भर जाए तो अपनी सांस रोके। फिर धीरे-धीरे सांस छोड़े। सांस छोड़ने में भी उतना समय लगायें जितना आपने सांस लेने में लिया था।

नाड़ी शोधन प्राणयाम करने दौरान निम्नलिखित सावधानियां बरतें: 
*नाड़ी शोधन प्राणयाम करते समय सांस उतना हीं रोकें जितना आपका सामर्थ्य हो।
*अगर आप अस्थमा के मरीज हैं या फिर किसी भी तरह के हृदय रोग से पीड़ित हों तो ये प्राणायाम न करें।
*अगर आप ज्यादा देर तक ये प्राणायाम करने में असमर्थ हो तो इसे कम समय के लिए ही करें।
*ये प्राणायाम खाली पेट ही करें।

3. मत्स्यासन: मत्स्यासन संस्कृत शब्द मत्स्य से निकला है जिसका अर्थ होता है मछली। मत्स्यासन योग पीठ के बल लेटकर किया जाने वाला आसन है। इसमें शरीर का आकार मछली जैसा प्रतीत होता है इसलिए इसको Fish Yoga Pose के नाम से भी जाना जाता है। अगर इसको सही विधि के साथ किया जाए इसके स्वस्थ लाभ अनेक हैं। मत्स्यासन योग गले एवं थाइरोइड के लिए एक उत्तम योगाभ्यास है। यह आपके पेट की चर्बी को कम करता है और कमर दर्द से राहत दिलाता है।


मत्स्यासन योग कैसे करें ?

  • साधक सबसे पहले पद्मासन में बैठ जाएं।
  • धीरे-धीरे पीछे झुकें और पूरी तरह पीठ पर लेट जाएं।
  • बाएं पांव को दाएं हाथ से पकड़े और दाएं पांव को बाएं हाथ से पकड़ें।
  • कोहनियों को जमीन पर टिका रहने दें।
  • घुटने जमीन से सटे होनी चाहिए
  • अब आप सांस लेते हुए अपने सिर को पीछे की ओर लेकर जाएं।
  • या हाथ के सहायता से भी आप अपने सिर को पीछे गर्दन की ओर कर सकते हैं।
  • धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े।
  • इस अवस्था को अपने हिसाब से मेन्टेन करें।
  • फिर लंबा सांस छोड़ते हुए अपने आरम्भिक अवस्था में आएं।
  • यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से आप 3 से 5 चक्र करें।

  • थाइरोइड का इलाज मत्स्यासन से: थाइरोइड के इलाज के लिए मत्स्यासन रामबाण का काम करता है। इस आसन से गर्दन वाले हिस्से में पाए जाने वाले थाइरोइड और पारा थाइरोइड का अच्छी तरह से मालिश हो जाता है जिससे थायरोक्सिन हॉर्मोन के स्राव में मदद मिलती है। यही थायरोक्सिन हॉर्मोन थाइरोइड के इलाज के लिए एक अहम भूमिका निभाता है।
4.सर्वांगासन: सर्वा का मतलब होता है सभी। इसका अर्थ यह हुआ कि वैसा आसन जो शरीर के हर भाग या अंगों को प्रभावित करता हो। स्वस्थ के लिए इस आसन की सार्थकता यहीं तक सीमित नहीं होती है। बल्कि योग एवं योग थेरेपी में सर्वांगासन का महत्व बहुत ज़्यदा है क्योंकि यह आपके स्वस्थ के साथ साथ शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर आपको बहुत आगे तक लेकर जाता है। शायद ही कोई ऐसी परेशानी या बीमारी हो जिसको यह आसन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में प्रभावित न करता हो। यह कंधों पर खड़े होने वाला आसन है और इसे उत्तानपादासन एवं विपरीतकरणी मुद्रा का विकसित रूप कहा जा सकता है।


सर्वांगासन कैसे करें ?

  • पीठ के बल लेट जाएं।
  • हाथों को जांघों के पास रखें।
  • अब आप अपनें पैरों को पहले 30 डिग्री पर फिर 60 डिग्री और उसके बाद 90 डिग्री तक ले कर जाएं।
  • हाथों को दबाकर नितंब ऊपर की ओर उठाते हुए पांवों को सिर की ओर लाएं।
  • सहारे के लिए हथेलियां पीठ पर रखें।
  • आप अपने शरीर को सीधा इस तरह से करते हैं कि ठोड़ी छाती पर आकर लगें।
  • ठोड़ी छाती पर इस तरह से लगाते हैं की गर्दन के थाइरोइड वाले हिस्से में दबाब पड़े।
  • अपने हिसाब से इस मुद्रा को धारण करें।
  • फिर पैरों को पहले 60 डिग्री पर फिर 30 डिग्री और धीरे-धीरे मूल अवस्था में लौटें।
  • जब आप नीचे लौटते हैं तो अपने हाथों को नितंब के नीचे लाएं ताकि आप अपने शरीर को बेगैर किसी चोट के आरंभिक अवस्था में ला सके।





इन योगासनो की मदद से आप थाइरोइड जैसे खतरनाक बीमारी को भी आसानी से मात दे देंगे। 

हम आपको अगले लेख में कुछ घरेलु उपाय बताएँगे जो की थाइरोइड को ख़तम करने में वरदान साबित होगी 


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साइलेंट किलर नामक बीमारी को खत्म करे योग से ।

साइलेंट किलर नाम से मशहूर इस बीमारी को बहुत ही खतरनाक माना जाता है।  आइये जानते है क्या इस इस बीमारी का उपाय  थायराइड को साइलेंट किलर मान...

Sunday, December 16, 2018


थायराइड गर्दन में स्थित एक छोटी सी ग्रंथि होती है। तितली के आकार की इस ग्रंथि का मूल काम शरीर के पाचनतंत्र (मेटाबोलिज़्म) को नियंत्रित करना होता है। मेटाबोलिज़्म को नियंत्रित करने के लिए शरीर थायराइड हार्मोन बनाता है। यह हार्मोन शरीर की कोशिकाओं को निर्देशित करता है कि कितनी ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाना है। यदि थायराइड सही तरीके से काम करे तो शरीर के मेटाबोलिज़म के कार्य के लिए आवश्यक हार्मोन की सही मात्रा बनी रहेगी।
जैसे-जैसे हार्मोन का उपयोग होता रहता है, थायराइड उसकी जगह भरता रहता है। थायराइड रक्त की धारा में हार्मोन की मात्रा को पिट्यूटरी ग्रंथि को संचालित करके नियंत्रित करता है। जब मस्तिष्क के नीचे खोपड़ी के बीच में स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि को यह पता चलता है कि थायराइड हार्मोन की कमी हुई है या उसकी मात्रा अधिक है तो वह अपने हार्मोन (टीएसएच) को समायोजित करता है और थायराइड को बताता है कि क्या करना है।
किसे होती है यह बीमारी 

यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। महिलाओं में पुरुषों के अनुपात में यह बीमारी पांच से आठ गुणा अधिक होने की संभावना रहती है। 

महिलाओ में थाइरोइड की समस्या बहुत ही आम बात हो गई है, लेकिन इसका इलाज बहुत लोगो को पता नहीं होता है और वो अंग्रेजी दवाइयों का सेवन करना शुरू कर देते है जो की बहुत हानिकारक सिद्ध होती है। इस बीमारी में महिलाओ की खूबसूरती पर ग्रहण लग जाता है उनका वजन बढ़ जाता है, शरीर का आकार ख़राब हो जाता है और चेहरे पर दाग धब्बे भी आने लग जाते है। इस लिए थाइरोइड से पीड़ित महिलाओ को जल्द से जल्द आयुर्वेदिक इलाज की तरफ जाना चाहिए । 
  • थायराइड के निम्नलिखित संभावित लक्षण हैं:
  • शारीरिक व मानसिक विकास का धीमा हो जाना।
  • 12 से 14 साल के बच्चे की शारीरिक वृद्धि रुक जाती है।
  • शरीर का वजन बढ़ने लगता है और शरीर में सूजन भी आ जाती है।
  • सोचने व बोलने की क्रिया धीमी हो जाती है।
  • शरीर का ताप कम हो जाता है, बाल झड़ने लगते हैं तथा गंजापन होने लगता है।
  • हर समय थकावट महसूस होना।
  • अक्सर और अधिक मासिक-धर्म होता है।
  • स्मरणशक्ति कमजोर होना।
  • त्वचा और बालों का सूखा और रूखा होना।
  • कर्कश वाणी।
  • सर्दी न सह नहीं पाना।
  • चिड़-चिड़ापन या अधैर्यता।
  • ठीक से नींद नहीं आना।
  • थायराइड का बढ़ जाना।
  • आंख की समस्या या आंख में जलन।
  • गर्मी के प्रति संवेदनशीलता।
  • शरीर का ताप सामान्य से अधिक हो जाता है।
  • उत्तेजना तथा घबराहट जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं।
  • शरीर के वजन में असंतुलन पैदा होना। 
  • कई लोगों की हाथ-पैर की अंगुलियों में कम्पन उत्पन्न हो जाता है।
  • मधुमेह रोग होने की प्रबल सम्भावना बन जाती है।
थायराइड में सूजन हो जाती है। इसमें सुई चुभने जैसा दर्द होता है। यह रंग में काला, छूने में खुरदरा तथा धीरे-धीरे से बढ़ने वाला होता है। यह कभी पक भी जाता है। इसमें रोगी का मुंह मुरझाया हुआ तथा गला और तालु सूखा रहता है।

थायराइड जहां पैदा होता है उस स्थान की खाल के रंग जैसा ही होता है। यह भारी, थोड़े दर्द वाला, छूने में ठंडा, आकार में बड़ा तथा ज्यादा खुजली वाला होता है।

मोटापे के कारण होने वाले थायराइड खुजली वाला, बदबूदार, पीले रंग की, छूने में मुलायम तथा बिना दर्द का होता है। इसकी जड़ पतली तथा ऊपर से मोटी होती है जो शरीर के घटने, बढ़ने के साथ ही घटता-बढ़ता रहता है। यह तुम्बी की तरह लटकता रहता है। इसके रोगी का मुंह तेल की लक्षण तरह चिकना होता है तथा उसके गले से हर समय घुर्र-घुर्र जैसी आवाज निकलती रहती है।
यदि थायराइड की बीमारी जल्दी पकड़ में आ जाती है तो लक्षण दिखाई देने से पहले इसके  आयुर्वेदिक इलाज से यह ठीक हो सकता है। थायराइड जीवन भर रहता है। लेकिन इसके सही से रहने पर थाइराड से पीड़ित व्यक्ति अपना जीवन स्वस्थ और सामान्य रूप से जी सकता है। थायराइड का रोग अधिकतर आयोडीन की कमी से होता है। कभी-कभी थायरॉयड ग्रंथि के बढ़ने के कारण भी ऐसा होता है। इस रोग में गर्दन या ठोड़ी में छोटी या बड़ी तथा अचल अंडकोष जैसी सूजन लटकती है।
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